अगले महीने 14 फरवरी को होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी एक नहीं बल्कि दो सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं। वैसे तो कांग्रेस पार्टी की तरफ से इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन ऐसी खबरें हैं कि एक दलित नेता के रूप में उभरे मुख्यमंत्री चन्नी आदमपुर और चमकौर साहिब से मैदान में उतर सकते हैं। दरअसल कांग्रेस यह स्पष्ट संदेश भेजकर दलित वोट बैंक को पूरी तरह से अपनी ओर लाने के लिए उत्सुक है कि यह एकमात्र पार्टी है जिसने समुदाय के एक सदस्य को मुख्यमंत्री बनाया है।

इन दो सीटों पर है चन्नी का खास फोकस, अकाली दल को चुनौती देना है मकसद? 

आदमपुर विधानसभा क्षेत्र अकाली दल का गढ़ रहा है, जिसने यहां से पांच विधानसभा चुनाव जीते हैं। कांग्रेस 2002 में केवल एक बार जीत सकी थी। कांग्रेस चरणजीत सिंह चन्नी जैसे शक्तिशाली उम्मीदवार को मैदान में उतारकर अकाली दल के प्रभुत्व को चुनौती देना चाहती है। पार्टी की रणनीति को ध्यान में रखते हुए चन्नी का फोकस चमकौर साहिब के अलावा आदमपुर विधानसभा क्षेत्र पर बना हुआ है। उन्होंने हाल ही में स्थानीय बस स्टॉप के नवीनीकरण, सिटी सेंटर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के विकास, जलापूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं के अलावा मुंडा गांव में सारागढ़ी स्टेडियम के अलावा 158 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं और एक क्रिकेट स्टेडियम की आधारशिला रखी थी। विपक्षी शिरोमणि अकाली दल और बसपा ने इस कदम को कांग्रेस की ‘हताशा’ करार दिया है।

क्या है कांग्रेस का जातीय गणित

शिरोमणि अकाली दल के विधायक पवन टीनू ने कहा, “मुख्यमंत्री को दो निर्वाचन क्षेत्रों से मैदान में उतारना बताता है कि कांग्रेस कितनी हताश है। चन्नी शिलान्यास कर रहे थे, लेकिन उनके द्वारा घोषित विकास कार्यों में से कोई भी शुरू नहीं किया गया है।” 2011 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में 2.77 करोड़ दलित आबादी है, जो मतदाताओं का 31.9% है। 19.4% दलित सिख हैं, 12.4% हिंदू दलित हैं और 0.98% बौद्ध दलित हैं। चरणजीत सिंह चन्नी दूसरे सबसे बड़े दलित समूह (रविदासिया) से संबंधित हैं, जो कुल दलित आबादी का 20.7% है। मझबी सिख, 26.3% आबादी के साथ, सबसे बड़ा दलित समुदाय है। अधर्मी और बाल्मीकि समुदाय राज्य में कुल दलित आबादी का 10% और 8.6% हैं।

चन्नी से पहले कैप्टन आजमा चुके हैं फार्मूला

रिपोर्ट्स की मानें तो 2017 में कांग्रेस को 41% दलित वोट मिले थे। ये 2012 की तुलना में 10% कम थे। इसके अलावा 43% हिंदू दलित वोट भी मिले थे। यदि दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा जाता है, तो ऐसा करने वाले चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस के अकेले नेता नहीं होंगे। इससे पहले 2017 में, कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी पार्टी ने दो विधानसभा क्षेत्रों-पटियाला अर्बन और लांबी से नामित किया था, जो बादलों का गढ़ रहा है। हालांकि, तब कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार अमरिंदर सिंह लांबी सीट पर प्रकाश सिंह बादल से हार गए थे।



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