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भारत में घूमने के लिए खूब जगह है। कुछ एतिहासिक तो कुछ बेहद खूबसूरत। कोई फोटोग्राफरों की पसंजदीदा है तो कोई सुकून प्रेमियों के लिए। इन्ही खूबसूरत जगहों में से एक है हैदराबाद की हुसैन सागर झील । ये जगह भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सबसे शानदार जगहों में से एक है। इस झीसस की खासियत है, झील के बीच में बनी बुद्धा मुर्ती। रात के समय में इसकी खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। इस मुर्ती तक पहुंचने के लिए आपको बोट का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि जितनी खूबसूरत ये जगह दिखती है उतना ही मुश्किल इसे बनाना था। इस प्रतिमा को स्थापित करने में करीब 2 साल लगे थे। ऐसे में इस मूर्ती से जुड़े कुछ रोचक तथ्य जानना तो बनता है। आइए, जानते हैं-

1) ये जगह हैदराबाद में है जो सबसे ऊंची अखंड पत्थर की मूर्ती है। ये जगह पर्यटकों के लिए आश्चर्य से भरी है। मूर्ती एक ठोस मंच के ऊपर खड़ी है, जिसकी ऊंचाई 15 फीट है। इसे झील के बीचों बीच बनाया गया था, ताकि मूर्ती को खड़ा करने में मदद मिले। इस मंच को रॉक ऑफ जिब्राल्टर के रूप में जाना जाता है। 

2) इसे साल 1983 और 1989 के बीच श्री स्वर्गीय एन टी राव द्वारा बनाया गया था, जो उस समय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे। इस प्रतिमा के बारे में ख्याल उन्हें स्टैचू ऑफ लिबर्टी को देख कर आया था। शुरूआत से ही मूर्ती को पत्थर से निर्मित किया जाना था। और एक लंबी खोज के बाद हैदराबाद से 40 मील दूर नलगोंडा के पास एक ठोस ग्रेनाइट चट्टान की खोज के बाद से काम शुरू किया गया। सन 1985 में काम का उद्घाटन किया गया। 

 

3) झील के बीचों बीच बुद्धा मूर्ती का निर्माण सेंकड़ों श्रमिकों के साथ मिलकर किया गया। पांच साल बाद इसका खर्चा यूएस डॉल 3 मिलियन था और प्रतिमा 58 फीट की थी और इसका वजन 350 टन था, यही वजह थी कि ये दुनिया की सबसे ऊंची मुर्ती बन गई।  

 

4) इसके काम में लगे 10 इंजिनियरों का भूल के कारण मूर्ती के फटने और झील में गिरने से एक बड़ा हादसा हुआ था। झील से मूर्ती को बाहर निकालने के लिए दो साल का समय लगा था। जिसके बाद 1 दिसंबर 1992 को झील के मंच पर मूर्ती स्थापित की गई। 

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