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डॉगी के पिल्ले यानी Puppy में आपको क्या सबसे अच्छी चीज लगती है? उसकी प्यारी जम्हाई या जब वह आपकी नाक चाटते हैं या फिर और कोई चीज? या फिर हो सकता है कि आपकी आंखों में उसका घूरना यानी ऐसा लगा रहो हो कि वह ये जानता हो कि आप उस वक्त क्या सोच रहे हैं. इनमें से चाहे जो भी हो लेकिन एक चीज तय है कि पिल्लों को उसके जन्म के तुरंत बाद ही वह आपसे संवाद के लिए तैयार हो जाता है.

ये बात यूनिवर्सिटी ऑफ एरोजोना स्कूल ऑफ एंथ्रोपोलोजी में  एरिज़ोना कैनाइन कॉग्निशन सेंटर में पोस्ट-डॉक्टरल शोध सहयोगी एमिली ब्रे ने बताई है. उन्होंने कहा कि पिल्ले शुरुआत से ही किसी भी व्यक्ति को टकटकी निगाहों से देखेंगे और उसकी तरफ से किसी भी इशारे पर वह अपने रिएक्ट करेंगे.  ब्रे पिछले एक दशक से कैनाइन कम्पेनियंस के सहयोग से गाइड डॉग डेवलपमेंट की स्टडी कर रही हैं, जो एक गैर-लाभकारी संगठन है और वयस्कों, बच्चों और शारीरिक या संज्ञानात्मक अक्षमता वाले बुजुर्गों को बिना किसी शुल्क के कुत्ते देता है.

‘करेंट बायोलॉजी’ में प्रकाशित स्टडी में बताया गया कि ब्रे और उनकी टीम ने 385 पिल्लों पर स्टडी किया जो करीब 8 हफ्ते के थे. इस दौरान उनके कुछ टास्क दिए गए थे- जैसे शोधकर्ताओं के साथ आंख मिलाना और शोधकर्ताओं के हाथ से इशारों को फॉलो करना और चार फीट की दूरी पर रखे दो कप के अंदर की चीज पर रिएक्ट करना.

ब्रे ने बताया कि हम जानते हैं कि इन टास्कों के लिए एडल्ट डॉग्स बेहतर है. लेकिन ये इन सभी चीजों के लिए कब से तैयार होने लग जाते हैं. उन्होंने बताया कि पिल्ले शुरू से ही लोगों के इशारों को समझने के लिए काफी दक्ष होते है और इस बात के कोई सबूत नहीं है कि उन चीजों को सिखाने के लिए उन्हें कोई प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती है.

ब्रे ने कहा कि एक पिल्ला को किसी आदमी की तरफ से दिखाई गई उंगली के इशारे या आंखों से पालन करने की क्षमता में 40% से अधिक भिन्नता को उनके द्वारा विरासत में मिले जीन द्वारा समझाया जा सकता है.



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