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कभी-कभी ऐसा लगता है कि बीमारियों से अधिक दवाएं हैं, और इसलिए कुछ लोग फार्मेसी से या अन्य स्टोर से खरीद लेते हैं. हालांकि, कुछ लोग डॉक्टर के नुस्खे का इंतजार करते हैं. लेकिन, इन दिनों व्यापक रुझान देखा जा रहा है कि भारतीय अब खुद से निर्धारित कर रहे हैं और ऐसी दवाइयां गटक रहे हैं, जिसे आम तौर पर पॉजिटिव पाए जाने या लक्षण दिखाई देने के बाद अस्पताल में कोविड-19 के मरीजों को दिया जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि इन मरीजों को बाद में अस्पताल पहुंचना पड़ता है और स्वीकार करते हैं कि ‘लोकप्रिय’ या ‘कोविड-19 के नाम से दवा’ जैसे आइवरमेक्टिन, हाइड्रोक्सीक्लेरेक्वीन का इस्तेमाल ‘गंभीर’ को रोकने के लिए किया है. 

दवा क्या है और कैसे बनाई जाती है?

दवा केमिकल या यौगिक होते हैं जिसका इस्तेमाल रोकथाम, इलाज, बीमारी की पहचान पर लक्षणों को हल्का करने में किया जाता है. दवाइयों के विकास ने डॉक्टरों को बहुत सारी बीमारियों का इलाज करने और जिंदगी बचाने में सक्षम बना बना दिया है. ये दवाएं विभिन्न स्रोतों से आती है. कुछ दवाइयों का विकास प्रकृति में पाए जानेवाले घटक से हुआ, और यहां तक कि आज भी बहुत लोग पौधों से अर्क निकालते हैं. कुछ दवाइयां विभिन्न प्रकार के केमिकल को एक साथ मिलाकर तैयार की जाती हैं. कुछ को आनुवांशिक रूप से बैक्टीरिया में जीन दाखिल कर वांछित घटक बनाया जाता है. लेकिन, अगर आप अपनी सेहत की चिंता करते हैं, तो इन दवाओं को लेने से बचें क्योंकि उससे समस्या पैदा हो सकती है. 

डॉक्टरी सलाह के बिना न करें प्रयोग

रेमडिसिवर- रेमडेसिविर दवा का इस्तेमाल घरेलू इस्तेमाल के लिए नहीं है. उसे सिर्फ अस्पताल के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए. कोविड-19 के मध्यम या गंभीर लक्षण में पूरक ऑक्सीजन के जरूरतमंदों को रेमडिसिविर का इंजेक्शन लगाया जाता है. 

स्टेरयॉड्स-  स्टेरयॉड्स जैसे डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल अस्पताल में सिर्फ नाजुक या गंभीर स्थिति के लिए है. 60 साल से ज्यादा समय से बाजार में उपलब्ध . आमतौर पर सूजन कम करने के लिए उसका उपयोग होता है. इसलिए, खुद से दवा को निर्धारित न करें. 

एंटीकोआगुलंट्स- ये दवाइयां क्लॉटिंग को कम करती हैं, लेकिन उन्हें डॉक्टर की सिफारिश पर मध्यम या गंभीर मामलों में दी जाती है. रसायनिक पदार्थ एंटीकोआगुलंट्स यानी आमतौर पर ब्लड पतला करने के रूप में जाना जाता है,.जो रक्त के जमाव को रोकते हैं या कम करते हैं, थक्के के समय को बढ़ाते हैं. 

टोसिलिजुमैब- इम्यूनोसपरसेंट का मतलब सिर्फ गंभीर या नाजुक स्थिति के लिए होता है. स्टेरयॉड्स दिए जाने के 24-48 घंटे बाद मरीज की स्थिति में कोई सुधार न होने पर ये दवा दी जाती है. 

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