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नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल के अनुसार अध्ययनों से इस बात का पता चला है कि वैक्सीनेशन के बाद लोगों को अस्पताल में भर्ती करने, ऑक्सिजन थैरेपी देने और आईसीयू में रखने की संभावना बेहद कम होती है. हाई रिस्क ग्रूप में शामिल हेल्थकेयर वर्कर्स में टीकाकरण अभियान के शुरुआती डाटा का अध्ययन करने से इस बात का पता चला है.

वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में इसको लेकर दो अलग-अलग अध्ययन किए गए. पहले अध्ययन में वैक्सीन लगवा चुके 8,991 हेल्थकेयर वर्कर्स को शामिल किया गया. इसमें वो हेल्थकेयर वर्कर्स भी शामिल थे जिन्हें अब तक वैक्सीन की केवल एक डोज ही लगी थी. यहां से मिले डाटा के आधार पर डॉ. वीके पॉल ने बताया कि वैक्सीन लगवाने के बाद आईसीयू में भर्ती होने की संभावना 94 प्रतिशत तक कम हो जाती है. जिस से पता चलता है कि हाई रिस्क ग्रुप में गंभीर इन्फ़ेक्शन के मामलों में भी वैक्सीन बेहद कारगर साबित होती है. 

डॉ. वीके पॉल ने बताया, “भारत में हुए अध्ययनों से इस बात का पता चला है कि वैक्सीन के बाद लोग इस कोरोना महामारी के खिलाफ ज्यादा सुरक्षित हो जाते हैं. हाई रिस्क ग्रुप में शामिल हेल्थकेयर वर्कर्स पर इस तरह के दो अध्ययन हुए हैं. इन अध्ययनों के अनुसार वैक्सीन लगवाने के बाद अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 75 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाती है. साथ ही इस से मिले डाटा से ये पता चला है कि यदि आपको वैक्सिनेशन के बाद इन्फ़ेक्शन होता है तो तब भी आपके अस्पताल में भर्ती होने की संभावना केवल 20 प्रतिशत तक होती है.”

केवल 8 प्रतिशत लोगों को पड़ सकती है ऑक्सीजन थैरेपी की जरुरत 

साथ ही डॉ. वीके पॉल ने बताया, “वैक्सीन लगवा चुके लोगों में से केवल 8 प्रतिशत लोगों में ही ऑक्सीजन थैरेपी देने की जरुरत होती है. साथ ही डाटा के अनुसार वैक्सीनेशन के बाद केवल 6 प्रतिशत लोगों को ही आईसीयू में भर्ती करने की नौबत पड़ सकती है. यानी वैक्सीन लगवा चुके 94 प्रतिशत लोगों में आईसीयू में भर्ती होने की संभावना खत्म हो जाती है. ये एक बेहद ही अहम और विश्वसनीय डाटा है. इस अध्ययन में हाई रिस्क ग्रुप में शामिल हेल्थकेयर वर्कर्स को शामिल किया गया था, जिनमें इन्फ़ेक्शन की संभावना सबसे अधिक होती है.”

गंभीर बीमारी वाले लोगों के बचाव के लिए भी है वैक्सीन कारगर 

साथ ही उन्होंने बताया, “क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के एक दूसरे अध्ययन में वैक्सीनेशन के बाद 7000 लोगों में से केवल एक मरीज की मृत्यु की बात सामने आई. इस से पता चलता है कि वैक्सीन गंभीर बीमारी वाले कोरोना के मरीजों के बचाव के लिए भी बेहद कारगर है.” क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज की इस दूसरी स्टडी में उन हेल्थकेयर वर्कर्स को शामिल किया गया था जिनको वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी हैं. इस स्टडी में शामिल 7,080 में से 679 मरीजों में वैक्सीन की डोज के 47 दिन बाद इन्फ़ेक्शन होने का मामला सामने आया.

स्टडी के अनुसार, “वैक्सीनेशन के बाद 65 प्रतिशत मामलों में इन्फ़ेक्शन से बचाव मिलता है. वहीं अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 77 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जबकि वैक्सीन लगवा चुके लोगों में से 92 प्रतिशत लोगों में ऑक्सीजन देने की जरुरत नहीं पड़ती. इसके अलावा आईसीयू में भर्ती करने की संभावना भी 94 प्रतिशत तक कम हो जाती है.” 

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