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निजी हाथों में सौंपे गए 6 राजकीय पॉलीटेक्निक में अगले सत्र से पढ़ाई शुरू नहीं हो पाएगी। इनके निजीकरण के फैसले में सब कुछ फाइनल होने के बाद अब मान्यता को लेकर नया पेच फंस गया है। एआईसीटीई ने अगले साल यानी 2022 तक इन संस्थानों को खोलने की मान्यता देने से इंकार कर दिया है।

प्रदेश के 31 पॉलीटेक्निक और 40 आईटीआई को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निजी हाथों में सौंपा जाना है। इनमें कई पॉलीटेक्निक तो अभी निर्माणाधीन हैं। जो 6 तैयार हो गए हैं उन्हें 6 आईटीआई के साथ पहले चरण में शामिल कर लिया गया है। निजीकरण के लिए चयनित आईटीआई पहले से संचालित हो रहे हैं। इसलिए उनमें नई मान्यता जैसी तकनीकी दिक्कत नहीं आ रही है। हालांकि नवनिर्मित पॉलीटेक्निकों के लिए संचालन के लिए एआईसीटीई से मान्यता लेना जरूरी है। जिन संचालकों को संस्थानों को चलाने की जिम्मेदारी मिली है।

घट रहे आवेदन, खाली रह रहीं सीटें
नए संस्थान खोलने पर रोक लगाने की बड़ी वजह पुराने संस्थानों में सीटों का खाली रह जाना माना गया है। पिछले कुछ सालों से पॉलीटेक्निक में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले युवाओं की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2016 में यह 5,31,132 थी, इस बार 3,90,894 युवाओं ने ही प्रवेश के लिए आवेदन किया था। कमी की बात करें पिछले चार सालों में 1,40,238 आवेदन कम हो गए। सूत्रों की मानें तो सीटें खाली रहने की वजह से बीते कुछ वर्षों में कई पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थान बंद हो गए हैं।

कोट: एआईसीटीई ने मान्यता देने से इंकार कर दिया है। इसके चलते प्रशिक्षण शुरू होने में देरी हो सकती है। एआईसीटीई के अधिकारियों से मान्यता देने के लिए पुनर्विचार करने की मांग की जाएगी। ऐसा हुआ तो नए सत्र से प्रशिक्षण प्रारंभ हो जाएगा। – मनोज कुमार, निदेशक प्राविधिक शिक्षा

पहले चरण की सूची में ये शामिल
पहले चरण में 6 जिन पॉलीटेक्निकों को सूची में शामिल किया गया है। उनमें मलकाना हरदोई, सरधना मेरठ, सहारनपुर देवबंद, कुलपहाड़ महोबा एवं अतरौलिया आजमगढ़ की राजकीय और बाराबंकी की राजकीय महिला पॉलीटेक्निक शामिल हैं। इनमें से बाराबंकी, हरदोई और मेरठ की संस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी एक ही ग्रुप को मिली है।
 



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