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भारत में प्रतिदिन कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है. अब ये वायरस गांव-देहात तक पैर पसार चुका है. ऐसे में अस्पतालों, बेड्स और ऑक्सीजन की किल्लत हो रही है. अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से कई लोगों की मौत हो रही है. हालाकि सरकार की ओर से ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने की लगातार कोशिश की जा रही है. लेकिन अभी भी बहुत लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है. इस बीच कई लोग ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से काम चला रहे हैं. कोरोना वायरस सीधे आपके लंग्स पर अटैक कर रहा है ऐसे में बहुत लोगों को सांस की परेशानी हो रही है. 

लोगों की इस बढ़ती परेशानी की वजह से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की भी डिमांड काफी तेजी से बढ़ गई है. हालांकि बहुत सारे लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है. आज हम आपको ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को लेकर जानकारी दे रहे हैं. ये कैसे काम करता है और कितने तरह का होता है.

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर क्या है?
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर एक डिवाइस है जो एंबियंट एयर से ऑक्सीजन को फिल्टर करती है. अगर किसी मरीज का ऑक्सीजन लेवल 90-94 प्रतिशत है तो आप ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से सांस ली जा सकती है. इससे आपको सांस लेने में तकलीफ नहीं होगी.

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कैसे काम करता है?
बता दें वातावरण में सिर्फ 21 प्रतिशत ऑक्सीजन होता है. बाकी 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 1 प्रतिशत दूसरी गैस होती हैं. अब ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हवा से सिर्फ ऑक्सीजन को फिल्टर करता है और दूसरी गैस को वापस छोड़ देता है. इससे मरीज को 90-95 प्रतिशत ऑक्सीजन मिल सकता है. 

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की जरूरत कब है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ऑक्सीजन लेवल 90-94 प्रतिशत होने पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से सांस लेने में मदद मिल सकती है, लेकिन ऑक्सीजन लेवल इससे नीचे जाने पर आपको तुरंत हॉक्सिपट में एडमिट होने की जरूरत है. 90 प्रतिशत से नीचे ऑक्सीजन लेवल पहुंचने पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से आराम नहीं मिलेगा. 
ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलिंडर में अतंर

ऑक्सीजन सिलिंडर में मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन होता है. जिसमें करीब 99 प्रतिशत कंसंट्रेटेड ऑक्सीजन होता है. इसमें मौजूद एयर प्रेशराइज्ड होती है. इससे मरीज को एक्स्ट्रीमली हाई फ्लो रेट में ऑक्सीजन सप्लाई होता है. एक ऑक्सीजन सिलिंडर से एक मिनट में करीब 15 लीटर तक ऑक्सीजन सप्लाई होती है. इसे रिफिल कराना होता है.
वहीं ऑक्सीजन कंसंट्रेटर 24×7 ऑपरेट हो सकते हैं. लेकिन ये प्रेशराइज्ड ऑक्सीजन नहीं दे पाते हैं. इससे 1 मिनट में सिर्फ 5-10 लीटर ऑक्सीजन ही सप्लाई हो सकती है. इसलिए गंभीर रुप से बीमार मरीजों के लिए ये उपयुक्त नहीं है.

कितनी तरह के होते हैं ऑक्सीजन कंसंट्रेटर?

मार्केट में आपको दो तरह के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मिल जाएंगे जिनमें-

1- होम ऑक्सीजन कंसंट्रेटर- इसे आप घर में भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ये कंसंट्रेटर्स बिजली से काम करते हैं. इन्हें ऑपरेट करने के लिए वॉल सॉकेट से पावर चाहिए. इस तरह के कंसंट्रेटर्स पोर्टेबल कंसंट्रेटर्स के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं. इसलिए गंभीर स्थिति के लिए इन्हें ज्यादा अच्छा ऑप्शन माना जाता है.
 
2- पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर- इन्हें कहीं भी ले जा सकते हैं. इन्हें ऑपरेट करने के लिए वॉल सॉकेट से लगातार पावर की जरूरत नहीं पड़ती. इनमें इन-बिल्ट बैटरी होती है. एक बार पूरी तरह से चार्ज करने के बाद ये 5-10 घंटे तक काम करता है. हालांकि इसमें ऑक्सीजन का फ्लो लिमिटेड रहता है. इसे गंभीर मरीज के लिए उचित नहीं माना जाता है.

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदते समय खास बातों का ख्याल रखें
आपको ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदते समय कैपेसिटी का ध्यान रखना है. ये अलग-अलग साइज के होते हैं. होम ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स 5L और 10L कैपेसिटी में मिलते हैं. कोशिश करें कि ज्यादा ऑक्सीजन कंसंट्रेशन लेवल वाले कंसंट्रेटर ही खरीदें. मार्केट में 40 हजार से 1 लाख के बीच इनकी कीमत है. 

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