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नाम न केवल एक संबोधन होता है बल्कि अपने आप में एक खास पहचान भी छिपाए होता है। सामान्य तौर पर हम इंसान जब किसी का नाम रखते हैं तो उसमें रंग, रूप या गुण इत्यादि को तलाश कर शामिल की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सड़क पर फर्राटा भरती कारों के ब्रांड नेम के पीछे क्या कहानियां छिपी होती हैं। 

कुछ कंपनियों के नाम उनके फाउंडर यानी संस्थापकों के नाम पर रखे गए हैं, लेकिन कई कंपनियां ऐसी भी हैं जिनके नाम के पीछे कुछ खास रहस्य भी छिपा है। आज हम आपको अपने इस लेख में ऐसे ही कुछ मशहूर कार ब्रांड्स के नाम के पीछे छिपे किस्सों के बारे में बताएंगे। तो आइये जानते हैं उन ब्रांड्स और उनसे जुड़ी दिलचस्प किस्सों के बारे में: 

BMW: जर्मनी की कार ब्रांड बीएमडब्ल्यू लग्जरी कार सेग्मेंट में खासी मशहूर है। शुरूआती दौर में कंपनी दक्षिणी जर्मनी के बारिया (Bavaria) इलाके में इंजनों का निर्माण करती थी, उस दौरान इस कंपनी का नाम बवेरियन मोटेरन वर्के (Bayerische Motoren Werke) हुआ करता था। जिसका अंग्रेजी में अनुवाद बावरिया मोटर वर्क होता है। इसी का संक्षिप्त नाम आज BMW के तौर पर जाना जाता है। 

Fiat: इटली की प्रमुख कार निर्माता कंपनी फिएट भारतीय बाजार में भी खासी मशहूर रही है। फिएट के बेहतर इंजन का इस्तेमाल मारुति सुजुकी से लेकर टाटा मोटर्स ने भी अपने कारों में किया है। कंपनी ने साल 1899 में ट्यूरिन में वाहनों का निर्माण शुरू किया था, इस कारखाने को इटैलियन ऑटोमोबाइल्स फैक्ट्री ऑफ ट्यूरिन के नाम से जाना जाता था। जिसे इटैलियन भाषा में (Fabbrica Italiana Automobili Torino) कहा जाता है, इसी का संक्षिप्त रूप आज FIAT है। 

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Hyundai: दक्षिण कोरिया की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी हुंडई की कारों को भारतीय बाजार में भी खासा पसंद किया जाता है। मारुति सुजुकी के बाद ये ब्रांड आज देश का दूसरा सबसे बड़ा लोकप्रिय कार ब्रांड है। दरअसल कोरियाई भाषा में Hyundai नाम अर्थ होता है “वर्तमान युग” या “आधुनिकता” ‘modernity’ इसी के आधार पर इस ब्रांड का नाम हुंडई पड़ा है। 

KIA: किया मोटर्स ने हाल ही में भारतीय बाजार में एंट्री की है, और बेहद कम समय में ये ब्रांड खासा मशहूर हो गया है। दरअसल, इस ब्रांड का नाम साउथ कोरियन भाषा के दो अक्षरों 起 (ki) और 亞 (a) से मिलकर बना है। इसमें 起 (ki) का अर्थ होता है “उदय होना, या बाहर आना” वहीं 亞 (a) का अर्थ होता है “पूर्व या एशिया”। इस लिहाज से इस कंपनी के नाम का पूरा अर्थ होगा एशिया से उदय होने वाला और अंग्रेजी में इसे “Rising from the East” भी पढ़ा जाता है।

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Rolls-Royce: रोल्स रॉयस एक ब्रिटिश वाहन निर्माता कंपनी और ये ब्रांड लंबे समय से लग्जरी कारों के लिए मशहूर है। इस ब्रांड का नाम कंपनी के दो संस्थापकों के नाम पर पड़ा है। साल 1884 में फेडरिक हेनरी रॉयस (Frederick Henry Royce) ने एक इलेक्ट्रिक/मकैनिकल बिजनेस की शुरूआत की थी और उसके बाइ साल 1904 में उन्होनें अपनी पहली कार बनाई। इस कार को उन्होनें अपने मित्र चार्ल्स स्टीवर्ट रोल्स (Charles Stewart Rolls) को दिखाया, जो कि चार्ल्स को काफी पसंद आई। इसके बाद दोनों ने पार्टनरशिप में कंपनी शुरू की और अपने नाम को साझा करते हुए कंपनी का नाम Rolls-Royce रखा।

Mercedes-Benz: मर्सिडीज़ बेन्ज़ ऑटो सेक्टर के सबसे पुराने ब्रांड्स में से एक है। जैसा कि इसके नाम से ही जाहिर है कि इसमें फाउंडर का नाम छिपा है, लेकिन ये महज आधी सच्चाई है। जी हां, जर्मनी के आटोमोबाइल अभियन्ता एवं इंजन-डिजाइनर कार्ल बेंज निसंदेह इस ब्रांड के फाउंडर थें, लेकिन इस ब्रांड का पहला नाम Mercedes ऑस्ट्रिया के बिजनेसमैन एमिल जेलिनेक (Emil Jellinek) के बेटी के नाम पर रखा गया है। ये कहानी थोड़ी लंबी है, जिसके बारे हम आपको फिर कभी तसल्ली से बताएंगे।  

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Tesla: टेस्ला, इलेक्ट्रिक कारों की दुनिया में इससे बड़ा नाम फिलहाल दूसरा कोई नहीं है। एलन मस्क की ये अमेरिका की कंपनी दुनिया भर में अपने बेहतरीन इलेक्ट्रिक कारों के लिए जानी जाती है। लेकिन इस ब्रांड के नाम के पीछे भी एक कहानी छिपी है। दरअसल, इसका नाम सर्बियाई आविष्कारक निकोला टेस्ला के नाम पर रखा गया है। जिन्होंने साल 1884 के दौरान अमेरिका में प्रवास किया और अपने शानदार इलेक्ट्रिकल वर्क्स के लिए मशहूर हुएं। 

Datsun: जापानी कंपनी दैटसन निसान की ही लो कास्ट ब्रांड है। पहले इसे DAT कहा जाता था जो कि इसके फाइनेंसर्स डेन, आओयामा और टेकूची के शुरुआती नामों से मिलकर बनाया गया था। बाद में कंपनी ने अपनी छोटी कार SON के आधार पर अपना नाम DATSON रखा। इस कार के बाजार में आने के बाद कंपनी को अहसास हुआ कि, जापानी भाषा में SON का अर्थ नुकसान होता है। जिसके बाद कंपनी ने नाम के अक्षरों में तब्दीली करते हुए इसे बदलकर Datsun कर दिया। 

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Ford: अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी फोर्ड अपने पावरफुल इंजन और शानदार कारों के लिए मशहूर है। फोर्ड की स्थापना सन 1914 में हुई थी और इसका नाम कंपनी के संस्थापक Henry Ford के ही नाम पर रखा गया है। फोर्ड ने अपनी पहली कार “मॉडल टी” को जब बाजार में उतारा था उस वक्त ट्रांसपोर्ट और अमेरिकी इंडस्ट्री में क्रांति आ गई थी। हेनरी फोर्ड कम्पनी के मालिक के रूप में वे दुनिया के सबसे धनी एवं विख्यात व्यक्तियों में से एक थें।

Toyota और Skoda: जापानी कंपनी टोयोटा का नाम भी कंपनी के संस्थापक Sakichi Toyoda के नाम पर पड़ा है, हालांकि टोयोटा बोलने और सुनने में ज्यादा सुलभ और बेहतर है इसलिए इसकी स्पेलिंग में थोड़ा बदलाव करते हुए टोयोडा की जगह ‘टोयोटा’ कर दिया गया। इसी तरह चेक गणराज्य की कंपनी Skoda का नाम भी कंपनी के फाउंडर Emil Škoda के नाम पर पड़ा है। 

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Volkswagen: फॉक्सवैगन का मुख्यालय वोल्फ़्सबर्ग, जर्मनी में है। यह कंपनी 28 मई 1937 को स्थापित हुई थी। दरअसल, इसकी कहानी तब शुरू होती है जब एडॉल्फ हिटलर ने आदेश दिया कि एक ऐसी कार बनाई जाए जो कि आम लोगों की जरूरतों को पूरा कर सके। हालांकि इस दौरान बहुत सी कंपनियां कारें बना रही थीं, लेकिन Beetle ने एक बेहद ही किफायती मॉडल पेश किया जो कि हिटलर को खासा पसंद आया। इसके बार इस कंपनी को नाम दिया गया, ये दो शब्दों से मिलकर बना है Volks और Wagen, दरअसल जर्मन भाषा में फॉक्स का अर्थ होता है जनता और वैगन का अर्थ होता है वाहन’। 

Volvo: स्विडिश वाहन निर्माता कंपनी वोल्वो को इसका नाम लैटिन अनुवाद के तौर पर मिला। कंपनी शुरूआती दौर में बाल बेयरिंग बनाती थी उस वक्त कंपनी का नाम Svenska Kullagerfabriken (SKF) हुआ करता था। बाद में साल 1915 में इस स्विडिश कंपनी ने जब ऑटो बिजनेस में एंट्री की तो ट्रेडमार्क ऑफिस में VOLVO (सभी अक्षरों कैपिटल में) के नाम से रजिस्ट्रेशन करवाया। दरअसल, लैटिन भाषा में इसका अर्थ होता है ‘I roll’ जो कि कंपनी के पारंपरिक व्यवसाय को दर्शाता है।  

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