PM Modi Joe Biden


म्यांमार में जारी हिंसा और चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पहली बार क्वाड (QUAD) देशों के प्रमुखों की बैठक होने जा रही है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा, “मैं क्वाड देशों के नेताओं के साथ पहली बैठक को लेकर बेहद उत्सुक हूं. यह क्वाड देशों के नेताओं का पहला सम्मेलन होगा.” उन्होंने आगे कहा, “इससे पहले भी मेरी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम योशिहिदे सुगा (Yoshihide Suga) के साथ बात हुई है लेकिन मैं आमने सामने की बैठक के इंतजार में हूं.” उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से सभी क्वाड देशों के बीच संबंध और मजबूत हो सकेगा.

माना जा रहा है कि जल्द ही क्वाड देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है. इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा शामिल हो सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने कहा कि चार देशों के मिलकर बात करने से आपसी रिश्ते भी सुधरेंगे. साथ ही साथ व्यापारिक गतिविधियों पर भी बातचीत हो सकेगी. उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह स्पष्ट किया है कि क्वाड देशों की इस बैठक से आपसी रिश्ते को और ज्यादा मजबूती मिलेगी.

हाल ही में हुई थी भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच बातचीत

हाल ही में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्चुअल समिट हुई थी. इस वर्चुअल समिट में दोनों देशों की पार्टनरशिप को नया आयाम दिया गया. दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ला दिया है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना संकट के दौरान ऑस्ट्रेलिया में फंसे भारतीयों कि देखरेख के लिए ऑस्ट्रेलियाई पीएम का शुक्रिया अदा किया. वहीं, स्कॉट मॉरिसन ने प्रधानमंत्री मोदी कि लीडरशिप की भूमिका की तारीफ की और कोरोना वायरस से लड़ाई में विश्व समुदाय की मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की.

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने चीन पर उठाए थे सवाल 

दोनों नेताओं कि चर्चा में चीन के खिलाफ लामबंदी भी साफ नजर आई. गौरतलब है कि हाल के सालों में आर्थिक दृष्टि से चीन ने ऑस्ट्रेलिया में खासी पैठ बना ली थी, लेकिन कोरोना वायरस के फैलने के बाद अमेरिका के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के खिलाफ जांच की मांग उठाई थी. मुख्यतः अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की अपील पर ही भारत ने WHO में चीन के खिलाफ जांच संबंधी प्रस्ताव का समर्थन किया था. इससे चीन का टेंशन में आना मुमकिन है.

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