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डॉक्टरों का कहना है कि 30 साल तक नियमित हेल्थ चेक-अप पुरानी बीमारियों को रोक सकता है. इसके अलावा, कई मरीजों को मेडिकल इलाज की जरूरत या सर्जरी को घटाने में भी मदद मिल सकती है. ये कहना है अपोलो क्लिनिक, पुण के जनरल फिजिशियन मुकेश बुधवानी का.

उन्होंने बताया, “युवाओं के लिए जरूरी है कि नियमित स्वास्थ्य चेक-अप कराते रहें क्योंकि इससे छिपे हुए खतरे को जानने में मदद मिलेगी.” उन्होंने स्पष्ट किया, “कभी-कभी, पुरानी बीमारियां साइलेंट होती हैं और शुरुआत में लक्षण नहीं महसूस किए जा सकते. थायराइड, लीवर और किडनी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, तनाव, चिंता, डिप्रेशन, अपच और माइग्रेन जैसी कुछ स्वास्थ्य समस्याएं वंशानुगत होती हैं. थायराइड की परेशानी युवा महिलाओं में आम है और बांझपन की वजह बन सकती है.”

शुरुआती चेक-अप बड़े खतरे से बचाने में मददगार

30-40 साल की उम्र में सुस्त जीवनशैली के कारण शुरू में डायबिटीज, मोटापा, फेफड़े, हाइपरटेंशन, मेटाबोलिक और दिल की बीमारी हो सकती है. डॉक्टर ने बताया कि शुरुआती स्तर पर इन समस्याओं की पहचान युवाओं को बड़ी बीमारियों या बाद में डायबिटीज और मोटापा से बचाएगा. नियमित चेक-अप में ब्लड टेस, वजन जांच, कोलेस्ट्रोल लेवल, यूरिक एसिड लेवल, किडनी, लीवर टेस्ट, ब्लड शुगर, मोटापा, फैट्स का ज्यादा सेवन जैसे कुछ पैमानों पर विचार करने की जरूरत होती है.

डॉक्टरों ने बताया पुराने रोग की करते हैं रोकथाम

उन्होंने कहा, “मैमोग्राम और पैम स्मीयर जांच छोटी उम्र में कराना जरूरी है. शरीर में विमान बी12, डी और कैल्शियम की कमी का मूल्यांकन करना चाहिए जिससे लंबे समय के प्रभाव जैसे डिमेंशिया, एकाग्रता में कमी, याद्दाश्त, गठिया से बचा सके. 32 साल की उम्र में 80 फीसद इन मामलों को उचित इलाज से बदला जा सकता है.” अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्टपील, नई दिल्ली के जनरल फिजिशयन नवनीत कुमार का मानना है कि कुछ सबसे आम और गंभीर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर समेत पुरानी स्थितियों का शुरुआत में कोई लक्षण जाहिर नहीं होता.

उन्होंने कहा, “लेकिन रूटीन चेक-अप से आप न सिर्फ डायबिटीज, दिल की बीमारी के खतरे से वाकिफ हो जाएंगे बल्कि कोलेस्ट्रोल और ब्लड शुगर के वर्तमान मान का भी पता चला पाएंगे. इससे निरंतर मॉनिटरिंग के जरिए बीमारी के आगे की प्रगति को खत्म करने में मदद मिलेगी और पेचीदगियों के खतरे को कम करेगा.” डॉक्टर बुधवानी के मुताबिक, योग, सूर्य नमस्कार, साइकिलिंग, तैराकी, ताजा फल और सब्जियों का सेवन, मसाले, तेल और प्रोसेस्ड फूड से परहेज जैसे जीवनशैली में बदलाव के कुछ उदाहरण हैं.

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