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भारतीय शेयर बाजारों की दिशा इस सप्ताह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर निर्णय और घरेलू मोर्चे पर वृहद आर्थिक आंकड़ों से तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है।

इसके अलावा बाजार भागीदारों की निगाह इस बात पर भी रहेगी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक बांड प्राप्ति में उतार-चढ़ाव को लेकर क्या रुख अपनाता है। अमेरिका में बांड पर प्राप्ति बढ़ने से वैश्विक स्तर पर बाजारों में करेक्शन आया है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका में बेरोजगारी दर के आंकड़े घटने तथा प्रोत्साहन पैकेज पर हस्ताक्षर के बाद बाजारों को कुछ समर्थन मिला है। लेकिन बांड पर प्राप्ति बढ़ने का दबाव बाजारों पर अधिक रहा। रेलिगेयर ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा, बाजार सबसे पहले औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देगा। ये आंकड़े शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद आए थे।

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े 15 मार्च को आने हैं। इसके अलावा कोविड-19 से जुड़े घटनाक्रमों तथा खबरों पर भी बाजार भागीदारों की निगाह रहेगी। मिश्रा ने कहा कि वैश्विक मोर्चे पर बाजार की निगाह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर निर्णय तथा बांड प्राप्ति में उतार-चढ़ाव को लेकर उसके रुख पर रहेगी। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, बाजार की निगाह 16 और 17 मार्च को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बाजार की दिशा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश के रुख, डॉलर के मुकाबले रुपये के उतार-चढ़ाव तथा ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों से भी तय होगी। कोटक सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष और प्रमुख बुनियादी शोध रुस्मिक ओझा ने कहा, सभी की निगाह फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। रिलायंस सिक्योरिटीज के रणनीति प्रमुख विनोद मोदी ने कहा, हमारा विचार है कि बांड पर प्राप्ति तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निवेशकों की धारणा प्रभावित होगी। निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है।

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