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इटली और फ्रांस ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविड-19 को दोबारा इस्तेमाल करने का संकेत दिया है. इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की है और दोनों नेताओं ने वैक्सीन के साथ टीकाकरण शुरू करने पर सहमति जताई. उन्होंने कहा है कि यूरोपीय मेडिसीन एजेंसी से हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा है.

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर बैन के पीछे फैसला क्या सियासी था?

ब्लड क्लॉट्स की आशंका पर वैक्सीन के इस्तेमाल को रोकने वाले 20 यूरोपीय यूनियन देशों में इटली और फ्रांस भी थे. हालांकि, नियामक संस्था का कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाने के बाद खून के थक्के जम गए. दवा कंपनी ने ब्लड क्लॉट्स की शिकायत को खारिज किया है. वहीं, WHO के विशेषज्ञों ने वैक्सीन को सुरक्षित बताते हुए टीकाकरण जारी रखने की नसीहत दी. लेकिन इस बीच वैक्सीन को रोके जाने की खबर के पीछे एक सियासी एंगल सामने आ रहा है.

सन की खबर के मुताबिक, फ्रांस और इटली ने भी माना है कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर उनका बैन सियासी है क्योंकि यूरोपीय यूनियन पर ब्रेक्जिट मुद्दे के चलते ‘छींटाकशी’ का आरोप लगाया गया था. गौरतलब है कि ये बयान लोगों के बढ़ते गुस्से के बीच आया है. माना जा रहा है कि अमेरिका और ब्रिटेन के मुकाबले महाद्वीप में टीकाकरण धीमी गति से चल रहा है. यूरोपीय यूनियन आयोग ने स्वीडिश दवा निर्माता कंपनी पर डोज छिपाने का गंभीर आरोप लगाया था.

ब्रेक्जिट मुद्दे के बहाने यूरोपीय यूनियन पर डाला गया था दबाव? 

इटली के मेडिसीन रेग्यूलेटर प्रमुख ने कहा कि फ्रांस और जर्मनी के बाद बैन के लिए इटली के राजनीतिज्ञों पर दबाव बनाया गया. उन्होंने कहा, “हमें स्थगित करने का मुद्दा मिला क्योंकि फ्रांस और जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों ने टीकाकरण को बीच में रोकना पसंद किया.” फ्रांस के मंत्री ने कहा कि कुछ चिंताएं थीं और उससे ज्यादा शायद समौझौते का उल्लंघन. उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं होने जा रहा है कि यूरोप अपना पैसा देकर बदले में कुछ न हासिल करे. लिहाजा, हम अपने हितों की रक्षा करेंगे. हो सकता है उसका कानूनी उपाच हो, मगर हमें उससे इंकार नहीं.”

उन्होंने बताया कि यूरोपीय यूनियन को ‘जरूर दबाव’ एस्ट्राजेनेका पर डालना चाहिए, जिससे कंपनी ज्यादा डोज की डिलीवरी करने पर मजबूर हो जाए. उनका कहना है कि अगर फ्रांस ने ऐसा अकेले किया, तब हम यूरोपीय देशों में ज्यादा मजबूत हैं. कोई भी कानूनी कार्यवाही से पहले राजनीतिक दबाव होना चाहिए. वैक्सीन पर बैन के फैसले का अजीब संयोग है कि यूरोपीय यूनियन ने ब्रिटेन के खिलाफ उत्तरी आयरलैंड में सीमा पर नियंत्रण मामले को लेकर कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है.

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