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Earbuds are Good or Bad: अक्सर कान में खुजली, असहजता या फिर मैल साफ करने के लिए लोग कान में ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा करना आपकी कान की सेहत के लिए कितना बड़ा खतरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो ईयरबड्स में रुई लगे होने की वजह से उसे कान साफ करने के लिए बेहद सुरक्षित विकल्प माना जाता है। लेकिन इसका बार-बार उपयोग आपके कान को नुकसान पहुंचाकर आपकी सुनने की क्षमता पर भी बुरा असर डाल सकता है। आइए जानते हैं आखिर कैसे ईयरबड के इस्तेमाल से आपके कान को क्यों और किस तरह का नुकसान होता है। 

अमेरिका के नेशनवाइड चिल्ड्रन अस्पताल के ईएनटी डॉक्टर क्रिस ने कहा, ‘लोगों को दो सबसे बड़ी गलत फहमी होती हैं । पहली, कान को घर में ही साफ करना चाहिए और दूसरी, कान साफ करने के लिए  ईयरबड्स  का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।’

कान में जमा मैल निकालने के लिए ईयरबड्स  का इस्तेमाल कान की मैल बाहर निकलने की जगह उसे कान के और भीतर धकेल देता है। ऐसा होने से कान के अंदर गंभीर चोटे आने के साथ-साथ कान संबंधी बीमारियां भी हो सकती है। शोधकर्तओं ने पाया कि  73 प्रतिशत कान के अंदर चोट कॉटन बड्स के इस्तेमाल करने के कारण होती है। 

ईयरबड यूज करने के नुकसान-

-ईयरबड यूज करने से कई बार कान की मैल बाहर आने की जगह अंदर की चली जाती है। यदि ये मैल कान के पर्दे तक पहुंच जाए तो उससे सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है।
-ईयरबड पर लगी रुई भले ही कोमल होती है, लेकिन इसका बार-बार इस्तेमाल कान की नसों को काफी नुकसान पहुंचाता है।
-कान का पर्दा काफी नाजुक होता है। रुई से बना ईयरबड भी यदि इस पर लगे तो उससे पर्दा फटने का खतरा रहता है. ये आपको बहरा बना सकता है।
-ईयरबड का बार-बार उपयोग करने से कान का छेद चौड़ा हो जाता है। इससे कान में धूल-मिट्टी आसानी से चली जाती है।
-कान शरीर का सबसे नाजुक अंग होता है। इसकी बनावट अंग्रेजी के एस अक्षर जैसी होती है। ईयरबड को कान में डालने से वह सीधा इयर ड्रम (टिम्पैनिक झिल्ली) जिसे कान का परदा भी कहते हैं, को टच करता है, यह बहुत नाजुक झिल्ली होती है, जरा से प्रेशर से फट भी सकती है और आपको बहरा तक बना सकती है।
-कभी-कभी सस्ते किस्म के ईयरबड की रूई वैक्स में चिपक कर अंदर ही रह जाती है, जिससे फंगस इंफेक्शन होने की संभावना रहती है।

ऐसे करें कान की सफाई-
कान की सफाई को लेकर मुंबई की ऑडियोलोगिस्ट सुश्री सना ज़ेब का कहना है कि, यह सच है कि बाहर की धूल-मिट्टी और हवा जब कानों के भीतर निर्मित वैक्स के संपर्क में आती हैं, तो वह गंदगी बनकर इकट्ठी होने लगती है, जिससे कानों में असहजता अथवा खुजली होती है। ऐसी स्थिति में लोगों को यही सुझाव दूंगी कि वे कान साफ करने के लिए ईयरबड, माचिस की तीली जैसी चीजों से कान साफ करने का प्रयास न करें। दरअसल सफाई के लिए आपके कान का अपना नेचुरल तरीका होता है। आप जब शॉवर लेते हैं तो आपके कान साफ होते रहते हैं। नहाते समय जो पानी और साबुन आपके कानों में प्रवेश करते हैं वो कान की मैल को ढीला करते हैं। ढीला मैल कान से अपने आप बाहर निकल जाता है।

कान साफ करने के लिए आप चाहे तो नहाने के बाद किसी पतले कॉटन के टुकड़े को छोटी उंगली में लपेटकर कान के अंदरूनी हिस्से को आराम से रगड़कर कान की मैल छुड़ा सते हैं। रोजाना ऐसा करने से आपके कान में मैल कभी नहीं जमेगा। लेकिन अगर आप खुद यह काम नहीं कर पा रहे या फिर कानों में वैक्स ज्यादा जमा हो गया है तो अपने डॉटर से परामर्श लें। डॉक्टर इस मैल को साफ़ करने के लिए आपको उचित सलाह देंगे।

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By admin

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