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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गणतंत्र दिवस

के मौके पर राजधानी में घुसकर जमकर बवाल काटा। जगह-जगह तोड़फोड़ और उपद्रव करते हुए हजारों किसान लाल किले तक जा पहुंचे। लाठी, डंडे और तलवारों से लैस इन उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर बेरहमी से वार किए। इस दौरान लाल किले से गिरकर दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हो गए।

हमले का एक वीडियो सामने आया है जिसमें दिख रहा है कि किसानों के हमले से बचने के लिए पुलिसकर्मी सुरक्षा नाले के नजदीक आ जाते हैं, लेकिन उपद्रवी यहां भी उनपर ताबड़तोड़ वार करते हैं। इस दौरान कई पुलिसकर्मी बुरी तरह घायल हो गए। दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया है कि इस हिंसक आंदोलन में उसके 83 जवान और अधिकारी घायल हुए हैं।

पुलिस ने मंगलवार को लगभग 90 मिनट तक चली अफरातफरी के बाद प्रदर्शनकारी किसानों को लालकिला परिसर से हटा दिया। किसान अपनी ट्रैक्टर परेड के निर्धारित मार्ग से हटकर इस ऐतिहासिक स्मारक तक पहुंच गए थे जहां उन्होंने अपने झंडे लगा दिए। लालकिले पहुंचे प्रदर्शनकारी उस ध्वज-स्तंभ पर भी अपना झंडा लगाते दिखे जिसपर प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।

इन प्रदर्शनकारियों में निहंग भी शामिल थे। बाद में, पुलिस ने लालकिला परिसर को खाली कराने के लिए लाठीचार्ज किया। इससे पहले लगातार उद्घोषणा की जा रही थी कि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से लालकिले से हट जाएं। इससे पहले, प्रदर्शनकारी ट्रैक्टर परेड के निर्धारित मार्ग से हटकर आईटीओ पहुंच गए। जब उन्होंने वहां से लुटियंस क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

किसानों ने ट्रैक्टर परेड के निर्धारित समय से काफी पहले ही दिल्ली के भीतर बढ़ना शुरू कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों को इस शर्त के साथ ट्रैक्टर परेड की अनुमति दी थी कि वे राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड के समाप्त होने के बाद निर्धारित मार्गों से ही अपनी रैली निकालेंगे।





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