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मेट्रो सिटीज की बढ़ती नाइट लाइफ और वेब सिरीज (web series) ने लोगों को मशीन बना कर रख दिया है। दिन भर काम की व्‍यस्‍तता और रात को नेटफ्लिक्स देखना। ऐसे में सोने का समय शायद ही किसी के पास हो। 3 से 4 घंटे की नींद हमारे लिए काफी नहीं है। जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है।

एक अच्छी नींद का मतलब है हर रात कम से कम 7 से 8 घंटे सोना। पर जब आप हर रोज इतनी नींद नहीं ले पाते तब क्‍या होता है? क्‍या आप भी वीकेंड्स पर दिन भर सोती हैं! और सोचती हैं कि इस तरह सप्‍ताह भर की नींद की कमी की भरपायी हो जाएगी? तो खुद कुछ भी सोचने की बजाए जानते हैं कि साइंस इस बारे में क्‍या कहता है।

हर रोज की नींद और वीकेंड की नींद

स्वीडन में, शोधकर्ताओं ने13 वर्षों के दौरान 38,000 से अधिक लोगों के नींद के पैटर्न का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों ने बताया कि वे सप्ताहांत में कितना सोते हैं।

इस शोध से पता चला है कि जो लोग सप्ताह के अंत में ज्यादा देर तक सोते थे उनका मृत्यु दर उन लोगों की तुलना में कम था, जो वीकेंड्स में पांच घंटे से कम सोते थे। इसका मतलब यह हो सकता है कि वीकेंड्स पर ज्यादा सोने वाले लोग अपनी नींद पूरी करने से सक्षम रहते हैं।

मगर डॉक्टर हर रोज़ एक निर्धारित समय पर सोने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि सभी को अपना स्लीप साइकिल मेन्टेन करना चाहिए और कम से काम 8 घंटे सोना चहिये।
 

क्या वीकेंड्स पर लंबी नींद के दुष्परिणाम हो सकते हैं?

जो लोग सप्ताह के दौरान नींद पूरी नहीं कर पाते वे अक्सर वीकेंड्स पर लंबी नींद लेने का प्रयास करते हैं। लेकिन एक नए अध्ययन से पता चलता है कि ऐसा करना शायद आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि वीकडेज़ पर नींद की कमी आपके चयापचय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। वहीं वीकेंड्स पर ज्यादा सोना आपके लिए ज़रा भी फ़ायदेमंद नहीं है, बल्कि इसका ठीक उल्टा असर हो सकता है।

कोलोराडो विश्वविद्यालय, बोल्डर के वरिष्ठ अध्ययन लेखक केनेथ राइट ने कहा कि वीकेंड्स पर लंबी नींद हानिकारक हो सकती है। नीराइट के अनुसार, लोगों को लगातार पर्याप्त नींद लेने की आवश्यकता है। “यदि आप एक स्वस्थ जीवन शैली जीना चाहते हैं।” तो स्लीपिंग पैटर्न अच्‍छा होना बहुत ज़रूरी है।

एक और अनोखा अध्‍ययन

वर्तमान जीव विज्ञान पत्रिका में कुछ माह पूर्व प्रकाशित अध्ययन में 36 स्वस्थ युवा वयस्कों को शामिल किया गया और सभी ने अपनी नौ रातें स्लीपिंग लैब में बितायीं। एक समूह को प्रत्येक रात 9 घंटे तक सोने की अनुमति दी गई थी। एक दूसरा केवल 5 घंटे सो सकता था। तीसरे समूह को पांच दिनों के लिए 5 घंटे की नींद की अनुमति दी गई थी, फिर एक सप्ताह के अंत में “रिकवरी” पीरियड चलाया गया।

जहां वे जितना चाहें उतनी देर तक सो सकते थे। इसके बाद, फिर वे दो रातों के लिए 5 घंटे की नींद में लौट आए।

 

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वीकेंड पर नींद की कमी पूरी करना

राइट की टीम ने पाया कि कई दिनों की नींद से वंचित समूह में, लोगों ने इंसुलिन के प्रति अपनी संवेदनशीलता खो दी। यह एक हॉर्मोन है, जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है। उन्होंने रात में अधिक खाना शुरू कर दिया था और औसतन उनका कुछ वजन बढ़ गया।

वीकेंड्स में जिस समूह को सोने की अनुमति दी गई थी, उसमें एक लाभ यह था कि उन लोगों ने रात को कम खाना खाया।

हालांकि, उन्होंने 5 घंटे की नींद में वापस आने के बाद, फिर से रात को खाना शुरू कर दिया और उनकी इंसुलिन संवेदनशीलता क्षीण होती गई।

 

तो क्‍या है अंतिम निर्णय

 

  • तीनों ही शोध इस बात की वकालत करते हैं कि हर रोज सात से आठ घंटे की नींद ही हेल्‍दी स्‍लीप है।
  • इसकी कमी स्‍वास्‍थ्‍य पर नकारात्‍मक असर डालती है।
  • वीकेंड की लंबी नींद आपकी थकान तो कम कर सकती है, मगर वह सप्‍ताह के दौरान अधूरी नींद की प्रतिपूर्ति नहीं कर सकती।

तो लेडीज अपने स्‍लीप साइकिल पर ध्‍यान दें और अच्‍छी नींद लें।

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By admin

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