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Success Story Of IAS Topper Suyash Chavan: सुयश चव्हाण यूपीएससी की फील्ड में आने के पहले मेडिकल के क्षेत्र में करियर बना चुके थे. वे एक स्टैबलिश डॉक्टर थे और उन्होंने मेडिकल में ही ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों पास किया था. कुछ कारणों से उन्होंने यूपीएससी के क्षेत्र में आने का मन बनाया और तैयारी शुरू कर दी. एमबीबीएस और एमडी सुयश ने पहली ही बार में यूपीएससी सीएसई परीक्षा में 56वीं रैंक के साथ टॉप किया और इंडियन फॉरेन सर्विसेस के लिए लिए सेलेक्ट हुए. साल 2018 आईएफएस बैच के सुयश ने इस परीक्षा में आधे अंक के महत्व के बारे में खुलकर बात की और बताया कि कैसे आधा अंक आपकी रैंक और कैडर सब बदल सकता है. जानते हैं सुयश से उनकी तैयारी के टिप्स.

अलग रैंक के लिए करें दूसरों से कुछ अलग –

दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सुयश ने जहां इस परीक्षा की तैयारी के विषय में बात की वहीं कुछ खास टिप्स भी दिए जिन्हें फॉलो करके कोई भी कैंडिडेट अपना सेलेक्शन सुनिश्चित कर सकता है. वे मानते हैं कि जब लाखों कैंडिडेट्स हर साल यह परीक्षा दे रहे हैं तो आपको कुछ ऐसा खास करना चाहिए जिससे उन सबको पीछे छोड़ते हुए आपका सेलेक्शन पक्का हो. कुछ खास स्ट्रेटजी, कुछ खास पढ़ने का तरीका और कुछ खास अपरोच सभी की इस परीक्षा को पास करने में अहम भूमिका है. अगर अलग रैंक चाहिए तो कुछ अलग करना होगा. अपने आप का सोचने का तरीका भी बदलना होगा और पढ़ने का शेड्यूल भी.

यहां देखें सुयश चव्हाण द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू –

प्लानिंग करें लेकिन रिवर्स –

सुयश कहते हैं कि परीक्षा के लिए प्लानिंग तो हर कोई करता है लेकिन आप रिवर्स प्लानिंग करें. यानी शुरुआत यहां से करें कि एग्जाम के एक दिन पहले आप क्या पढ़ रहे होंगे, एक हफ्ते पहले क्या, एक महीने पहले क्या और इसी तरह बाकी साल की भी योजना बना लें. वे कहते हैं कि इससे बहुत लाभ होता है और आपको पता होता है कि कौन सा विषय आपको कब तक खत्म करना है और उसे कितने दिन देने हैं. इस समय तक कितनी बार आपका रिवीजन हो जाना चाहिए और अंतिम दिनों में कैसे प्रॉपर प्लानिंग के माध्यम से आप स्ट्रेस से बच सकते हैं.

दूसरी अहम बात आती है ऑप्शनल को लेकर. सुयश  कहते हैं कि अपनी जरूरत के अनुसार ऑप्शनल चुनें और अगर वह बड़ा हो तो रोज कुछ घंटे निकालकर पहले इसे खत्म करें वरना अंत में यह एक बोझ बन जाएगा और आप बेवजह का तनाव लेंगे कि अभी ऑप्शनल ही पूरा नहीं हुआ है. एक डॉक्टर होने के नाते सुयश का ऑप्शनल मेडिकल साइंस था जोकि एक लेंदी विषय है पर प्रॉपर प्लानिंग के माध्यम से उन्होंने इसे समय से खत्म कर लिया था.

 

सुबह की शुरुआत हो रिवीजन से –

सुयश उन कैंडिडेट्स में से नहीं हैं जो साल के अंत के कुछ महीने रिवीजन को देने की योजना बनाते हैं. वे कहते हैं कि इस प्रकार का रिवीजन न संभव होता है न फलदायक. बेहतर होगा कि जो कल पढ़ा है, उसे अगले दिन सुबह रिवाइज करने के बाद ही आगे की पढ़ाई आरंभ करें. वे हर दिन रिवीजन करने के फंडे पर काम करना पसंद करते हैं. इससे आप चीजें भूलते नहीं हैं और सुबह का समय उन्होंने इसलिए तय किया क्योंकि इस समय किसी का भी दिमाग फ्रेश होता है.

ऐज आवर निकालें –

अपनी तैयारी को खास बनाने के विषय को एक्सप्लेन करते हुए सुयश कहते हैं कि कैसे आप अपने आंसर्स को खास बनाएंगे जिससे आपको दूसरों से अच्छे अंक मिलें. इसके लिए रोज रात में सोने के पहले ऐज आवर निकालें यानी वो घंटे जिसमें आप अपने तैयार किए विषयों में वैल्यु एडिशन करते हैं जैसे उनसे संबंधित कोट्स, डेटा, फैक्ट्स, चार्ट्स, रिपोर्ट्स, स्टडीज, एग्जाम्पल्स वगैरह प्रिपेयर करना. सुयश मानते हैं कि रात के समय वैसे भी प्रोडक्टिविटी बहुत कम हो जाती है ऐसे में इस समय का बेस्ट इस्तेमाल यही है कि इस दौरान डेटा आदि रट लें. इससे आपके आंसर्स में भी जान आएगी और आपका समय भी बेस्ट यूटिलाइज हो जाएगा.

आधे अंक का महत्व –

परीक्षा की तैयारी के विषय में अपना मत रखते हुए सुयश कहते हैं कि इस एग्जाम के आधे अंक की इंपॉर्टेंस को समझें. मेन्स में कुल सात पेपर होते हैं और अगर एक पेपर में 20 प्रश्न आते हैं तो सातों पेपर के सभी प्रश्नों के आधे अंक अतिरिक्त पाकर आप कुल स्कोर में 50 से 60 अंकों की बढ़ोत्तरी कर सकते हैं. ये अंक बहुत हैं आपकी रैंक और कैडर बदलने के लिए. इसलिए तैयारी के दौरान इस आधे अंक के लिए अतिरिक्त प्रयास करें. जैसे उत्तर के साथ डायग्राम बनाना, डायग्राम में कलर्स यूज करना, डेटा और फैक्ट्स डालना, एग्जाम्पल्स के साथ अपनी बात को प्रूफ करना. एक पन्ने में डायग्राम बनाकर और उत्तर के कुछ बिंदु लिखकर उसी आंसर को अगले पेज तक ले जाना, इससे एग्जामिनर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है. इसी प्रकार बहुत सी छोटी-छोटी लेकिन जरूरी टिप्स का ध्यान रखिए. जैसे सभी प्रश्न अटेम्प्ट करना, घड़ी को फास्ट फॉरवर्ड रखना ताकि अंत में अतिरिक्त समय मिले और इसकी प्रैक्टिस पहले से करना, एक आंसर को दो पेज पर ले जाना, शुरुआत का पेपर बहुत अच्छे से और सफाई के साथ करना ताकि एग्जामिनर पर पहला इंप्रेशन अच्छा पड़े.

अंत में सुयश यही कहते हैं कि जब इस परीक्षा की तैयारी के लिए मैदान में कूदें तो अपना पिछला ट्रैक रिकॉर्ड कहीं किनारे रख आएं. आप किस बैकग्राउंड के हैं या आपके पहले कैसे अंक आते थे जैसी किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता अगर आप कड़ी मेहनत और प्रॉपर प्लानिंग के साथ तैयारी कर रहे हैं. इसलिए कांफिडेंस के साथ आगे बढ़ें और इंटरनेट पर उपलब्ध बहुत सी सुविधाओं का भरपूर इस्तेमाल करें.

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